मंगलवार, 18 सितंबर 2012

पावन प्रेम

प्रेम से पावन अहसास से मन भावन,
हमने पाया ना दूजा,
अपनी चिर आगोशी में अन्तस का आचवन,
हमें भाया ना दूजा,
मनन चिंतन और आक्रोश का आलंबन,
हम पर छाया ना दूजा,
अंतर कि कस्तूरी से अंजान रे मानव,
काहे पत्थर को पूजा,
" नानेश " मानवता से पाक पावन,
धरती पर धर्म नहीं है दूजा.

योगेश सरवाड " नानेश "
१८.०९.२०१२

6 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. भाई,
      हौसला बढ़ाने और पंक्तियों को मान देने का
      ह्रदय से आभार
      स्नेह बनाये रखे

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  2. Waaaaaahhhhhh,,
    kamaal dhamaal shararat hai shabdo ki,
    shandaar aur jaandar vinyaas,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
    kyaa khoob bhaaviroye hai shabdo me,
    mera pasandida test shabdo ki mahak
    sidhe antas me utar gayi,,,,,,
    sadhuwad sveekare mere sakha,,,,,,,,,,,,

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    1. मित्रा,
      हौसला बढ़ाने और पंक्तियों को मान देने का
      ह्रदय से आभार
      स्नेह बनाये रखे

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  3. बहुत सुन्दर भाव योगेश भाई सच कहा आपने प्रेम से पावन और सकारात्मक अहसास और कोई नहीं है इस दुनिया में

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    1. दीदी,
      हौसला बढ़ाने और पंक्तियों को मान देने का
      ह्रदय से आभार
      स्नेह बनाये रखे

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