बुधवार, 25 सितंबर 2013

गीत ....एक कोशिश ....



आई रे बासंती छाई रे बासंती ...
पर तू न आया मेरे प्यार .......

विहग भी लौट के घर को आए
लौट के आए सारे साथी संगी ...
पर तू न आया मेरे प्यार .......

रोज बनाऊँ मैं तो भात और रोटी
किस्मत मेरी देखो कितनी खोटी
बाट निहारूँ दिल से पुकारूँ
लौट के आजा मेरे जीवन साथी...
पर तू न आया मेरे प्यार .......

रात की चाँदनी छटा बिखेरे
बिरहा की मारी तड़पूँ अकेरे
दिन बरस सब बित गए रे
मिलन की कोई ऋतु ना आती...
पर तू न आया मेरे प्यार .......

- योगेश सरवाड "  नानेश "      
        १७.०६.२०१३

शुक्रवार, 14 जून 2013


इतना वक्त न हम लेते इजहार-ए-मुहब्बत कर जाने का,
जज्बा गर पक्का हो जाता उनके इश्क में ..मर जाने का,

वक्त की स्याही ने लिख डाली सिर्फ जफा हर इक पन्ने पर
तन्हाई अब ढूंढा करती एक सबब बस .........घर जाने का

उनको हक है वो रुसवाई और बेरुखी .............सब दे डालें
कुछ खुद है 'नानेश' भी दोषी अश्क से दिल को भर जाने का

लिख देते जो वक्त पे हम इजहार-ए-मुहब्बत का अफसाना
न ये सितम होता किस्मत का हर इक शाम बिखर जाने का

हश्र अगर वो जान सकेंगे मेरे लब ................के पैमाने का
सोच भी न पाएंगे फिर तो मयखाने ...........के दर जाने का

- योगेश सरवाड "   नानेश "    
१०.०६.२०१३