शनिवार, 20 अगस्त 2016

Meri Kavitaye : इतना वक्त न हम लेते इजहार-ए-मुहब्बत कर जाने का, ...

Meri Kavitaye :
इतना वक्त न हम लेते इजहार-ए-मुहब्बत कर जाने का,
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: इतना वक्त न हम लेते इजहार-ए-मुहब्बत कर जाने का, जज्बा गर पक्का हो जाता उनके इश्क में ..मर जाने का, वक्त की स्याही ने लिख डाली सिर्फ जफ...

बुधवार, 25 सितंबर 2013

गीत ....एक कोशिश ....



आई रे बासंती छाई रे बासंती ...
पर तू न आया मेरे प्यार .......

विहग भी लौट के घर को आए
लौट के आए सारे साथी संगी ...
पर तू न आया मेरे प्यार .......

रोज बनाऊँ मैं तो भात और रोटी
किस्मत मेरी देखो कितनी खोटी
बाट निहारूँ दिल से पुकारूँ
लौट के आजा मेरे जीवन साथी...
पर तू न आया मेरे प्यार .......

रात की चाँदनी छटा बिखेरे
बिरहा की मारी तड़पूँ अकेरे
दिन बरस सब बित गए रे
मिलन की कोई ऋतु ना आती...
पर तू न आया मेरे प्यार .......

- योगेश सरवाड "  नानेश "      
        १७.०६.२०१३

शुक्रवार, 14 जून 2013


इतना वक्त न हम लेते इजहार-ए-मुहब्बत कर जाने का,
जज्बा गर पक्का हो जाता उनके इश्क में ..मर जाने का,

वक्त की स्याही ने लिख डाली सिर्फ जफा हर इक पन्ने पर
तन्हाई अब ढूंढा करती एक सबब बस .........घर जाने का

उनको हक है वो रुसवाई और बेरुखी .............सब दे डालें
कुछ खुद है 'नानेश' भी दोषी अश्क से दिल को भर जाने का

लिख देते जो वक्त पे हम इजहार-ए-मुहब्बत का अफसाना
न ये सितम होता किस्मत का हर इक शाम बिखर जाने का

हश्र अगर वो जान सकेंगे मेरे लब ................के पैमाने का
सोच भी न पाएंगे फिर तो मयखाने ...........के दर जाने का

- योगेश सरवाड "   नानेश "    
१०.०६.२०१३

रविवार, 30 सितंबर 2012

" अन्तस कि यात्रा "

घर में बैठा क्या है निकल बाहर,
मेरा दिल कहता है बार-बार,
देख कर दुर्दशा भारत वर्ष कि,
अंतर मन रोता है ज़ार-ज़ार,

मानवीय संवेदनाए मर गई,

मानवता कहती है बार-बार,
महत्वाकांक्षा में डुबी राजनीति से,
गरीबों का पेट मचा रहा हाहाकार,

हे मनु कि संतान उठ अब,

जयचंद कर रहे इतिहास तार-तार,
राणा तुम्ही हो शिवा तुम्ही हो,
इस सृष्टि कि तुम्ही हो यादगार,

यू ही कब तक सफेदपोश करेगे,

आम आदमी का बन्टाधार,
निकलना खुद को पड़ेगा घर से "नानेश",
अब धरा पर नहीं होगा कोई चमत्कार .


योगेश सरवाड " नानेश "
२९.०९.२०१२

सोमवार, 24 सितंबर 2012

ये कैसा राजा

यह भी कोई राजा कि सभ्यता है,
                                   "मेरी इक चुप सौ जवाबो से बेहतर है !"
यह भी कोई बादशाह का तरीका है,

                                        " रूपये कोई पेड़ पर नहीं लगते है !"
यह कहा का कैसा कायदा है,
                                       चित भी मेरी पट भी मेरी रखते है !
यह कहा के और कैसे नियम है,
                     अंधेर नगरी और चौपट राजा सी बात करते है !
यह इनकी कैसी रीति निति है,
                         अजायबघर सा हिन्दुस्तान को समझते है !
अब हमें कदम तरतीब से बढ़ाने है,
                           इक तरफ कुआं दूसरी और खाई देखते है !
है अख़लाक़ इनका दोगला "नानेश",
                            मुख में राम बगल में छुरी लिए घूमते है !!


                                                                                      योगेश सरवाड " नानेश "
                                                                   २५.०९.२०१२

मंगलवार, 18 सितंबर 2012

पावन प्रेम

प्रेम से पावन अहसास से मन भावन,
हमने पाया ना दूजा,
अपनी चिर आगोशी में अन्तस का आचवन,
हमें भाया ना दूजा,
मनन चिंतन और आक्रोश का आलंबन,
हम पर छाया ना दूजा,
अंतर कि कस्तूरी से अंजान रे मानव,
काहे पत्थर को पूजा,
" नानेश " मानवता से पाक पावन,
धरती पर धर्म नहीं है दूजा.

योगेश सरवाड " नानेश "
१८.०९.२०१२

मंगलवार, 11 सितंबर 2012

इक छोटी सी कोशिश .................

जिंदगी भी किसी इम्तेहान से कम है,
                                                      जहां गम है वहा हम है !
पलक खुलते ही इम्तेहान शुरू
रुपयों कि अंधी दौड़ में,
                            समय चक्र का इम्तेहान .....
पेट भरने कि हौड़ में,
                              आटे दाल का इम्तेहान .....
रिश्तों कि बाजीगरी में,
                         रिश्ते निभाने का इम्तेहान .....
इसीलिए तो " नानेश " कहे सबसे
केवल पढ़ाईं में ही नहीं
वरन
जीवन के हर पथ पर होता है इम्तेहान !


योगेश सरवाड " नानेश "
११.०९.२०१२