इक छोटी सी कोशिश .................
जिंदगी भी किसी इम्तेहान से कम है,
जहां गम है वहा हम है !
पलक खुलते ही इम्तेहान शुरू
रुपयों कि अंधी दौड़ में,
समय चक्र का इम्तेहान .....
पेट भरने कि हौड़ में,
आटे दाल का इम्तेहान .....
रिश्तों कि बाजीगरी में,
रिश्ते निभाने का इम्तेहान .....
इसीलिए तो " नानेश " कहे सबसे
केवल पढ़ाईं में ही नहीं
वरन
जीवन के हर पथ पर होता है इम्तेहान !
योगेश सरवाड " नानेश "
११.०९.२०१२
जहां गम है वहा हम है !
पलक खुलते ही इम्तेहान शुरू
रुपयों कि अंधी दौड़ में,
समय चक्र का इम्तेहान .....
पेट भरने कि हौड़ में,
आटे दाल का इम्तेहान .....
रिश्तों कि बाजीगरी में,
रिश्ते निभाने का इम्तेहान .....
इसीलिए तो " नानेश " कहे सबसे
केवल पढ़ाईं में ही नहीं
वरन
जीवन के हर पथ पर होता है इम्तेहान !
योगेश सरवाड " नानेश "
११.०९.२०१२
Very nice dada .... Achchhi koshish hai.
जवाब देंहटाएंअलभ भाई,
हटाएंह्रदय से आभार
जिंदगी इम्तेहान लेती है...
जवाब देंहटाएंइम्तेहान लेकर ही सिखाती है...
दादा,
हटाएंसच कहा आपने
जिंदगी इम्तेहान लेकर ही सिखाती है