आई रे बासंती छाई रे बासंती ...
पर तू न आया मेरे प्यार .......
विहग भी लौट के घर को आए
लौट के आए सारे साथी संगी ...
पर तू न आया मेरे प्यार .......
रोज बनाऊँ मैं तो भात और रोटी
किस्मत मेरी देखो कितनी खोटी
बाट निहारूँ दिल से पुकारूँ
लौट के आजा मेरे जीवन साथी...
पर तू न आया मेरे प्यार .......
रात की चाँदनी छटा बिखेरे
बिरहा की मारी तड़पूँ अकेरे
दिन बरस सब बित गए रे
मिलन की कोई ऋतु ना आती...
पर तू न आया मेरे प्यार .......
- योगेश सरवाड " नानेश "
पर तू न आया मेरे प्यार .......
विहग भी लौट के घर को आए
लौट के आए सारे साथी संगी ...
पर तू न आया मेरे प्यार .......
रोज बनाऊँ मैं तो भात और रोटी
किस्मत मेरी देखो कितनी खोटी
बाट निहारूँ दिल से पुकारूँ
लौट के आजा मेरे जीवन साथी...
पर तू न आया मेरे प्यार .......
रात की चाँदनी छटा बिखेरे
बिरहा की मारी तड़पूँ अकेरे
दिन बरस सब बित गए रे
मिलन की कोई ऋतु ना आती...
पर तू न आया मेरे प्यार .......
- योगेश सरवाड " नानेश "
१७.०६.२०१३

बहुत शानदार योगेश भाई
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