इतना वक्त न हम लेते इजहार-ए-मुहब्बत कर जाने का,
जज्बा गर पक्का हो जाता उनके इश्क में ..मर जाने का,
वक्त की स्याही ने लिख डाली सिर्फ जफा हर इक पन्ने पर
तन्हाई अब ढूंढा करती एक सबब बस .........घर जाने का
उनको हक है वो रुसवाई और बेरुखी .............सब दे डालें
कुछ खुद है 'नानेश' भी दोषी अश्क से दिल को भर जाने का
लिख देते जो वक्त पे हम इजहार-ए-मुहब्बत का अफसाना
न ये सितम होता किस्मत का हर इक शाम बिखर जाने का
हश्र अगर वो जान सकेंगे मेरे लब ................के पैमाने का
सोच भी न पाएंगे फिर तो मयखाने ...........के दर जाने का
- योगेश सरवाड " नानेश "
१०.०६.२०१३
जज्बा गर पक्का हो जाता उनके इश्क में ..मर जाने का,
वक्त की स्याही ने लिख डाली सिर्फ जफा हर इक पन्ने पर
तन्हाई अब ढूंढा करती एक सबब बस .........घर जाने का
उनको हक है वो रुसवाई और बेरुखी .............सब दे डालें
कुछ खुद है 'नानेश' भी दोषी अश्क से दिल को भर जाने का
लिख देते जो वक्त पे हम इजहार-ए-मुहब्बत का अफसाना
न ये सितम होता किस्मत का हर इक शाम बिखर जाने का
हश्र अगर वो जान सकेंगे मेरे लब ................के पैमाने का
सोच भी न पाएंगे फिर तो मयखाने ...........के दर जाने का
- योगेश सरवाड " नानेश "
१०.०६.२०१३
वाह .......
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर सत्य सार्थक सृजन .....
दादा कभी अभी इस छोटी बहन के बोलग पे भी आइयेगा .....
http://rasaatmika.blogspot.in/
बिलकुल दीदी
हटाएंब्लॉग में सही से चला नहीं पा रहा हु ऐड कैसे करू यह पता नहीं है
Dada very good. Best of luck
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