बदलाव कि चली जो बयार,
तो होगी नौका पार,
कि थोड़ा ठण्ड रख ले .....
कि थोड़ा ठण्ड रख ले .....
कसाब बिरयानी खाये,
बाबा के हिस्से डंडे आये,
भरेगा जल्द पाप का घड़ा .....
कि थोड़ा ठण्ड रख ले .....
कि थोड़ा ठण्ड रख ले .....
गरीब को महगाई मारे,
सरकार केवल बयान से तारे,
इन भ्रष्टो का कुटुम्ब बड़ा .....
कि थोड़ा ठण्ड रख ले .....
कि थोड़ा ठण्ड रख ले .....
पहने सफेदी काम करे काले,
खा जाये कोयला भी चोर है साले,
देश का कैसे भीखमंगो से पाला पड़ा .....
कि थोड़ा ठण्ड रख ले .....
कि थोड़ा ठण्ड रख ले .....
योगेश सरवाड " नानेश "
३०.०८.२०१२
तो होगी नौका पार,
कि थोड़ा ठण्ड रख ले .....
कि थोड़ा ठण्ड रख ले .....
कसाब बिरयानी खाये,
बाबा के हिस्से डंडे आये,
भरेगा जल्द पाप का घड़ा .....
कि थोड़ा ठण्ड रख ले .....
कि थोड़ा ठण्ड रख ले .....
गरीब को महगाई मारे,
सरकार केवल बयान से तारे,
इन भ्रष्टो का कुटुम्ब बड़ा .....
कि थोड़ा ठण्ड रख ले .....
कि थोड़ा ठण्ड रख ले .....
पहने सफेदी काम करे काले,
खा जाये कोयला भी चोर है साले,
देश का कैसे भीखमंगो से पाला पड़ा .....
कि थोड़ा ठण्ड रख ले .....
कि थोड़ा ठण्ड रख ले .....
योगेश सरवाड " नानेश "
३०.०८.२०१२
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